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Meem Maroof Ashraf
aqal kahti hai ki sauda hai ziyaan ka
aqal kahti hai ki sauda hai ziyaan ka | अक़्ल कहती है कि सौदा है ज़ियाँ का
- Meem Maroof Ashraf
अक़्ल
कहती
है
कि
सौदा
है
ज़ियाँ
का
और
तुझे
दिल
बे
तहाशा
चाहता
है
- Meem Maroof Ashraf
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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तमाम
उलझनों
में
भी
यूँँ
मुस्कुराता
है
न
जाने
इतना
हुनर
वो
कहाँ
से
लाता
है
Harsh saxena
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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अब
दुआएँ
पा
रहा
है
हर
दिल-ए-नाशाद
की
क्या
ग़ज़ब
होगा
वो
जिसने
ख़ुद-कुशी
ईजाद
की
शा'इरी
का
ये
हुनर
कुछ
देर
से
आया
मगर
जी-हुज़ूरी
की
नहीं
मैंने
किसी
उस्ताद
की
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Rituraj kumar
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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जो
कुछ
मता-ए-हुनर
हो
तो
सामने
लाओ
कि
ये
ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग
नहीं
Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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बे-गिनती
बोसे
लेंगे
रुख़-ए-दिल-पसंद
के
आशिक़
तिरे
पढ़े
नहीं
इल्म-ए-हिसाब
को
Haidar Ali Aatish
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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मोहब्बत
हम
तुम्हारे
मामले
में
बहुत
कमज़ोर
पड़ते
जा
रहे
हैं
Meem Maroof Ashraf
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बे-वफ़ा
अब
न
लेंगे
नाम
तिरा
आज
से
नाम
बे-वफ़ा
डाला
Meem Maroof Ashraf
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किसी
के
याद
करने
का
अगर
होती
सबब
हिचकी
मिरा
महबूब
हो
कर
के
परेशाँ
मर
गया
होता
Meem Maroof Ashraf
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थोड़ा
बहुत
तो
याद
रहेगा
ज़रूर
वो
थोड़ा
बहुत
तो
अब
भी
उसे
चाहते
हैं
हम
Meem Maroof Ashraf
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जान-ए-जाँ
हम
तुझे
तसव्वुर
में
अपने
सीने
लगा
के
सोते
हैं
Meem Maroof Ashraf
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