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Meem Maroof Ashraf
apna bas itnaa hi fasana hai
apna bas itnaa hi fasana hai | अपना बस इतना ही फ़साना है
- Meem Maroof Ashraf
अपना
बस
इतना
ही
फ़साना
है
इक
हसीना
है
इक
दिवाना
है
- Meem Maroof Ashraf
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हर
क़दम
हर
साँस
गिरवी
ज़िंदगी
रहम-ओ-करम
इतने
एहसानों
पे
जीने
से
तो
मर
जाना
सही
Ajeetendra Aazi Tamaam
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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उसने
हँसते
हुए
तोड़ा
था
हमारा
रिश्ता
हम
सभी
को
ये
बताते
हुए
रो
देते
हैं
Zubair Alam
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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ले
साँस
भी
आहिस्ता
कि
नाज़ुक
है
बहुत
काम
आफ़ाक़
की
इस
कारगह-ए-शीशागरी
का
Meer Taqi Meer
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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तुम्हारे
बाद
के
बोसों
में
जानाँ
तुम्हारी
सांस
की
ख़ुशबू
नहीं
थी
Vikas Rana
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ज़ीस्त
अब
मुस्कुराने
वाली
है
मौत
लगता
है
आने
वाली
है
मेरी
दुनिया
उजाड़
कर
के
तू
किस
की
दुनिया
बसाने
वाली
है
इश्क़
क्या
उस
को
कुछ
नहीं
आता
बस
वो
बातें
बनाने
वाली
है
बच
के
रहना
कि
हाँ
वही
लड़की
का'बा-ए-दिल
को
ढाने
वाली
है
फिर
से
वो
बन
सँवर
के
निकली
है
फिर
क़यामत
उठाने
वाली
है
किस
को
होगा
नसीब
तेरा
बदन
किस
को
दुनिया
घुमाने
वाली
है
क़ैस
की
तरह
आज
कल
'क़ैसर'
अपनी
हालत
दिवाने
वाली
है
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Meem Maroof Ashraf
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अब
भी
जानम
मना
रहे
हैं
हम
तेरा
मातम
मना
रहे
हैं
हम
तू
कि
ख़ुशियाँ
मना
रहा
है
वहाँ
याँ
तिरा
ग़म
मना
रहे
हैं
हम
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Meem Maroof Ashraf
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कोई
भी
चाल
मेरे
हक़
में
नहीं
सूरत-ए-हाल
मेरे
हक़
में
नहीं
वो
गुज़श्ता
दिनों
मुयस्सर
था
ये
मह-ओ-साल
मेरे
हक़
में
नहीं
गर्दिश-ए-बख़्त
का
तसल्लुत
है
कुछ
भी
फिलहाल
मेरे
हक़
में
नहीं
कैसे
ख़ुशियाँ
मनाऊँ
तेरे
बग़ैर
ईद-ए-शव्वाल
मेरे
हक़
में
नहीं
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Meem Maroof Ashraf
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आप-बीती
सुना
रहा
हूँ
तुम्हें
मैं
कोई
शा'इरी
नहीं
करता
Meem Maroof Ashraf
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सर
कटा
कर
ही
सुर्ख़-रूई
है
इश्क़
भी
कर्बला
का
मैदाँ
है
Meem Maroof Ashraf
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