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Manish watan
vo aaina bhi hamse ab bola hai
vo aaina bhi hamse ab bola hai | वो आईना भी हम सेे अब बोला है
- Manish watan
वो
आईना
भी
हम
सेे
अब
बोला
है
जो
पहले
उल्टा
सीधा
सब
बोला
है
मैं
बरसों
से
क़ैदी
हूँ
अपने
दिल
में
तुझको
थोड़ा
घाव
मिला
तब
बोला
है
- Manish watan
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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ये
इत्तिफ़ाक़
ज़रूरी
नहीं
दोबारा
हो
मैं
तुम
को
सोचने
बैठूँ
तो
ज़ख़्म
भर
जाएँ
Abhishek shukla
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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वो
बड़े
प्यार
से
कहते
हैं
कि
आप
अपने
हैं
और
अपनों
को
ही
तो
ज़ख़्म
दिए
जाते
हैं
Akash Rajpoot
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दोस्त
सफ़र
में
दम
घुटने
लग
जाए
तो
फिर
रस्ते
में
पेड़
उगाना
पड़ता
है
कौन
सुनेगा
चुप
की
भाषा
दोस्त
यहाँ
दिल
टूटे
तो
शोर
मचाना
पड़ता
है
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Manish watan
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जिस
दिन
ये
ग़म
समझेगा
मेरे
दुख
का
मतलब
उस
दिन
ही
ये
मर
जाएगा
यार
बिचारा
दुख
Manish watan
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ज़िंदगी
ज़िंदगी
में
नहीं
अब
बात
वो
आशिक़ी
में
नहीं
अब
जान
तक
दे
गए
लोग
सोचो
प्यार
ऐसा
किसी
में
नहीं
अब
इक
नज़र
आसमाँ
पर
है
डाली
चाँद
ख़ुद
रौशनी
में
नहीं
अब
बाद
तेरे
सफ़र
छोड़
आए
देख
हम
उस
गली
में
नहीं
अब
जो
मिरा
नाच
कर
होश
खो
दे
दम
किसी
मोरनी
में
नहीं
अब
इश्क़
पर
इक
कहावत
लिखी
है
इश्क़
शामिल
ख़ुशी
में
नहीं
अब
ख़ुद
सभी
लोग
का
मसअला
है
ये
कमी
बस
हमीं
में
नहीं
अब
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Manish watan
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आ
जाएगा
लौट
के
वो
इक
रोज़
कहीं
हमने
भी
रातों
को
जगकर
देखा
है
Manish watan
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साथ
मेरे
कभी
चला
होता
तो
तुझे
दर्द
का
पता
होता
ख़्वाब
टूटे
हुए
मिले
मुझको
काश
पहले
कभी
जगा
होता
मैं
न
होता
दुखी
बिछड़ने
पर
यार
दिल
से
गले
लगा
होता
देख
तेरे
क़दम
नहीं
बढ़ते
छोड़
जाना
अगर
सज़ा
होता
एक
ठोकर
लगी
मुझे
फिर
से
काश
पहला
निशाँ
मिटा
होता
फिर
कहीं
एक
रोज़
जीता
मैं
यार
थोड़ा
अगर
बचा
होता
मौत
का
है
'मनीष'
दुख
किसको
लाश
का
तो
अता-पता
होता
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Manish watan
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