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Manish watan
saath mere kabhi chala hota
saath mere kabhi chala hota | साथ मेरे कभी चला होता
- Manish watan
साथ
मेरे
कभी
चला
होता
तो
तुझे
दर्द
का
पता
होता
ख़्वाब
टूटे
हुए
मिले
मुझको
काश
पहले
कभी
जगा
होता
मैं
न
होता
दुखी
बिछड़ने
पर
यार
दिल
से
गले
लगा
होता
देख
तेरे
क़दम
नहीं
बढ़ते
छोड़
जाना
अगर
सज़ा
होता
एक
ठोकर
लगी
मुझे
फिर
से
काश
पहला
निशाँ
मिटा
होता
फिर
कहीं
एक
रोज़
जीता
मैं
यार
थोड़ा
अगर
बचा
होता
मौत
का
है
'मनीष'
दुख
किसको
लाश
का
तो
अता-पता
होता
- Manish watan
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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कोई
अटका
हुआ
है
पल
शायद
वक़्त
में
पड़
गया
है
बल
शायद
दिल
अगर
है
तो
दर्द
भी
होगा
इस
का
कोई
नहीं
है
हल
शायद
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Gulzar
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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दर्द
सहने
का
अलग
अंदाज़
है
जी
रहे
हैं
हम
अदा
की
ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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न
आया
ग़म
भी
मोहब्बत
में
साज़गार
मुझे
वो
ख़ुद
तड़प
गए
देखा
जो
बे-क़रार
मुझे
Asad Bhopali
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कुछ
पाने
के
लिए
निकला
हूॅं
अब
मैं
देखूॅंगा
खोना
क्या
होगा
मुझ
को
Manish watan
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तिरी
इक
मुलाक़ात
से
भर
गया
दिल
तुझे
ज़िंदगी
भर
मिलेंगे
नहीं
हम
मुनासिब
नहीं
अब
हमारा
लगे
दिल
किसी
शख़्स
पर
अब
मरेंगे
नहीं
हम
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Manish watan
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वो
आईना
भी
हम
सेे
अब
बोला
है
जो
पहले
उल्टा
सीधा
सब
बोला
है
मैं
बरसों
से
क़ैदी
हूँ
अपने
दिल
में
तुझको
थोड़ा
घाव
मिला
तब
बोला
है
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Manish watan
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सभी
ज़ख़्म
मुरझा
गए
हैं
हमारे
कभी
भी
किसी
में
खिलेंगे
नहीं
हम
बता
कर
गया
है
खुले
ज़ख़्म
रखना
कभी
ज़ख़्म
अपने
सिलेंगे
नहीं
हम
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Manish watan
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तेरे
ख़ातिर
ज़िंदगानी
इक
काम
ज़रूरी
है
पत्थर
डूब
के
उछले
ऐसा
नाम
ज़रूरी
है
मुझको
करनी
है
मन
मानी
अपनी
ख़ूबी
पर
दोस्त
ख़ुदा
तक
जाना
ये
पैग़ाम
ज़रूरी
है
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Manish watan
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