khush-fahm sa khushiyaan lutaaye ja raha hooñ main yahaan | ख़ुश-फ़हम सा ख़ुशियाँ लुटाए जा रहा हूँ मैं यहाँँ

  - Manohar Shimpi
ख़ुश-फ़हमसाख़ुशियाँलुटाएजारहाहूँमैंयहाँँ
बिछड़ेहुएकोफिरमिलाएजारहाहूँमैंयहाँँ
बेरंगसीहोलीकहाँपरखेलताहैफिरकोई
रंगेहुएकपड़ेदिखाएजारहाहूँमैंयहाँँ
हरपलयहाँइनउलझनोंसेसीखनाहैअबमुझे
इसनासमझदिलकोबताएजारहाहूँमैंयहाँँ
सम्मानयोद्धाकाकियाकरतेसभीअहल-ए-वतन
उनकेलिएतालीबजाएजारहाहूँमैंयहाँँ
नफ़रतभरामाहौलअबभीवाकईमौजूदहै
कुछफ़ासलेउसकेमिटाएजारहाहूँमैंयहाँँ
अश'आरदिलसेलिखरहाहूँइसग़ज़लकेमैंअभी
लिखकेग़ज़लमिसरेसजाएजारहाहूँमैंयहाँँ
  - Manohar Shimpi
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