kaise aab-e-talkh bahte the na jaane mere hi | कैसे आब-ए-तल्ख़ बहते थे न जाने मेरे ही

  - Manohar Shimpi
कैसेआब-ए-तल्ख़बहतेथेजानेमेरेही
अश्क़सेअबयादआतेहैज़मानेमेरेही
देखकेरख़्त-ए-सफ़रहीदर्दहोताक्यूँँमुझे
साथलेकिनहैदियाअहद-ए-वफ़ानेमेरेही
एकतिनकाहूँहवासेहीकहींउड़तारहूँ
आजहैकलकेकहाँहैफिरठिकानेमेरेही
इसजहाँमेंअजनबीसाहीलगेहैअबमुझे
क्यूँकियाबे-दख़्लमुझकोफिरख़ुदानेमेरेही
काशकोईबाततोसुनता'मनोहर'वोकभी
फिरतह-ए-दिलसेपुकाराहैवफ़ानेमेरेही
  - Manohar Shimpi
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