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Manohar Shimpi
bulan
bulan | बलंदी पर भी दुश्वारी दिखेगी
- Manohar Shimpi
बलंदी
पर
भी
दुश्वारी
दिखेगी
मशक़्क़त
ही
वहाँ
सारी
दिखेगी
अगर
धोखा
मिला
है
दोस्ती
में
वहाँ
पर
यार
मक्कारी
दिखेगी
ज़ियाफ़त
कोई
बच्ची
जब
करे
तब
खुले
दिल
से
कहूँ
प्यारी
दिखेगी
जफ़ा
में
बे-वफ़ा
जब
सच
बताए
वफ़ा
में
फिर
वफ़ादारी
दिखेगी
अदालत
या
अदावत
कब
रुकी
है
लड़ाई
हक़
की
तो
जारी
दिखेगी
अभी
तो
हुस्न
का
उसके
कहें
क्या
बिना
वो
साज़
के
प्यारी
दिखेगी
लड़े
औलाद
के
जब
वास्ते
माँ
अदालत
में
न
माँ
हारी
दिखेगी
'मनोहर'
क्या
किसी
से
ही
कहे
अब
ग़रीबों
में
ही
ख़ुद्दारी
दिखेगी
- Manohar Shimpi
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मुझ
से
क्या
हो
सका
वफ़ा
के
सिवा
मुझ
को
मिलता
भी
क्या
सज़ा
के
सिवा
Hafeez Jalandhari
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वक़्त
पर
फ़ैसला
नहीं
करते,
और
फिर
'काश!..काश!'
करते
हो।
Tanoj Dadhich
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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अब
हवाएँ
ही
करेंगी
रौशनी
का
फ़ैसला
जिस
दिए
में
जान
होगी
वो
दिया
रह
जाएगा
Mahshar Badayuni
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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ये
तो
कहिए
इस
ख़ता
की
क्या
सज़ा
मैं
जो
कह
दूँ
आप
पर
मरता
हूँ
मैं
Dagh Dehlvi
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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नदी
में
दोस्त
सब
मिलके
नहाना
छोड़
आए
हैं
नहाते
तैरते
पानी
उड़ाना
छोड़
आए
हैं
Manohar Shimpi
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अश्क-ए-रवाँ
बहे
कोई
उस
पर
दवाँ
कहे
कोई
इंसानियत
अगर
रहे
बख़्त-ए-जवाँ
रहे
कोई
दिखते
सरोज
हैं
अगर
बाग़-ए-रवाँ
कहे
कोई
मुश्किल
अगर
सफ़र
रहे
दर्द-ए-दवाँ
रहे
कोई
बरसात
में
कहीं
कहीं
आब-ए-रवाँ
रहे
कोई
मंज़र
दिखे
न
आसमाँ
अब्र-ए-रवाँ
बहे
कोई
दूरी
न
हिज्र
में
दिखे
तब
हम-नवाँ
रहे
कोई
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Manohar Shimpi
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दिल
की
बातें
समझाने
आए
हैं
दिल
से
दिल
ही
बहलाने
आए
हैं
आँखों
में
रहता
है
कोई
अपना
सपना
थोड़े
समझाने
आए
हैं
बारिश
गिरती
तो
ऐसा
लगता
है
बादल
बनके
परवाने
आए
हैं
माँझी
को
दूरी
तो
तय
करनी
है
कश्ती
थोड़े
लहराने
आए
हैं
जब
भी
खिलते
गुलशन
फूलों
से
ही
ख़ुशबू
बनकर
महकाने
आए
हैं
सच्चे
दिल
से
ही
मिलने
आए
हैं
हम
थोड़े
ही
बहकाने
आए
हैं
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Manohar Shimpi
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वस्ल
की
तेरे
बेक़रारी
है
ख़ूब
क़िस्मत
लिखी
हमारी
है
Manohar Shimpi
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जाकर
वहाँ
क्या
है
'मनोहर'
अब
वहाँ
जिनके
कभी
था
साथ
में
वो
हैं
कहाँ
Manohar Shimpi
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