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Manas Ank
ham sab bahut hi gair mukammal hain aapke
ham sab bahut hi gair mukammal hain aapke | हम सब बहुत ही ग़ैर मुकम्मल हैं आपके
- Manas Ank
हम
सब
बहुत
ही
ग़ैर
मुकम्मल
हैं
आपके
आशिक़
सभी
तो
लड़के
ये
अव्वल
हैं
आपके
- Manas Ank
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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वरना
तो
बेवफ़ाई
किसे
कब
मुआ'फ़
है
तू
मेरी
जान
है
सो
तुझे
सब
मुआ'फ़
है
क्यूँ
पूछती
हो
मैंने
तुम्हें
माफ़
कर
दिया
ख़ामोश
हो
गया
हूँ
मैं
मतलब
मुआ'फ़
है
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Vikram Gaur Vairagi
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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लड़कियों
को
क्यूँ
ये
लगता
रहता
है
सिर्फ़
लड़के
होते
भूखे
जिस्म
के
Manas Ank
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अब
तू
मुझी
से
दूर
है
मंज़ूर
है
ये
इश्क़
का
दस्तूर
है
मंज़ूर
है
Manas Ank
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नहीं
चलती
कभी
मर्ज़ी
हमारी
बताओ
तो
ज़रा
ग़लती
हमारी
जहाँ
पर
तैरने
को
कह
रहे
हो
वहीं
पर
डूबी
है
कश्ती
हमारी
यहाँ
भौंरा
कली
को
खा
गया
है
कि
जो'कर
से
मरी
रानी
हमारी
बड़ी
मुश्किल
से
ही
हमको
मिली
थी
उठा
ली
आपने
कुर्सी
हमारी
त'अल्लुक़
आपका
हम
सेे
नहीं
जब
तो
क्यूँ
फिर
चाटते
जूती
हमारी
कुआँ
कब
आएगा
इस
प्यासे
के
पास
कि
रस्ता
देखती
खिड़की
हमारी
बग़ीचे
पर
तुम्हें
इतना
गुमाँ
है
रखो
तुम
फूल
है
तितली
हमारी
बड़ा
महँगा
बताते
थे
हमें
तुम
लगी
बोली
यहाँ
सस्ती
हमारी
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Manas Ank
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काफ़िरों
तुम
अज़ाँ
से
हटो
बादलों
आसमाँ
से
हटो
बोली
मुझ
सेे
त'अल्लुक़
नहीं
तुम
मेरे
दरमियाँ
से
हटो
रौनकें
तुम
सेे
बनती
कहाँ
बज़्म
आराइयाँ
से
हटो
कोई
किरदार
मेरा
नहीं
अब
इसी
दास्ताँ
से
हटो
फालतू
भीड़
क्यूँ
है
लगी
जल्द
ही
तुम
वहाँ
से
हटो
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Manas Ank
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पिता
की
बात
अपने
मान
लो
तुम
नहीं
होगी
कभी
शादी
हमारी
Manas Ank
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