jab hua irfaan to gham aaraam-e-jaan banta gaya | जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गया

  - Majrooh Sultanpuri
जबहुआइरफ़ाँतोग़मआराम-ए-जाँबनतागया
सोज़-ए-जानाँदिलमेंसोज़-ए-दीगराँबनतागया
रफ़्तारफ़्तामुंक़लिबहोतीगईरस्म-ए-चमन
धीरेधीरेनग़्मा-ए-दिलभीफ़ुग़ाँबनतागया
मैंअकेलाहीचलाथाजानिब-ए-मंज़िलमगर
लोगसाथआतेगएऔरकारवाँबनतागया
मैंतोजबजानूँकिभरदेसाग़र-ए-हर-ख़ास-ओ-आम
यूँँतोजोआयावहीपीर-ए-मुग़ाँबनतागया
जिसतरफ़भीचलपड़ेहमआबला-पायान-ए-शौक़
ख़ारसेगुलऔरगुलसेगुलसिताँबनतागया
शरह-ए-ग़मतोमुख़्तसरहोतीगईउसकेहुज़ूर
लफ़्ज़जोमुँहसेनिकलादास्ताँबनतागया
दहरमें'मजरूह'कोईजावेदाँमज़मूँकहाँ
मैंजिसेछूतागयावोजावेदाँबनतागया
  - Majrooh Sultanpuri
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