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Kabir Altamash
ab hamaare ped saare ye kahaan hi jaante hain
ab hamaare ped saare ye kahaan hi jaante hain | अब हमारे पेड़ सारे ये कहाँ ही जानते हैं
- Kabir Altamash
अब
हमारे
पेड़
सारे
ये
कहाँ
ही
जानते
हैं
एक
लड़की
ने
कहा
था
मुझ
सेे
इक
पौधा
लगाना
- Kabir Altamash
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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परिंदे
लड़
ही
पड़े
जाएदाद
पर
आख़िर
शजर
पे
लिक्खा
हुआ
है
शजर
बराए-फ़रोख़्त
Afzal Khan
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तुमको
फ़िराक-ए-यार
ने
मिस्मार
कर
दिया
मुझको
फ़िराक-ए-यार
ने
फ़नकार
कर
दिया
गुल
से
मुतालिबा
जो
किया
बोसे
का
शजर
गुल
ने
हिला
के
पत्तियाँ
इनकार
कर
दिया
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Shajar Abbas
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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एक
पत्ता
शजर-ए-उम्र
से
लो
और
गिरा
लोग
कहते
हैं
मुबारक
हो
नया
साल
तुम्हें
Unknown
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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तुम्हें
ये
जान
कर
शायद
ख़ुशी
होगी
तुम्हें
अब
छोड़ने
वाला
है
इक
लड़का
Kabir Altamash
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अब
तो
ख़ुश
हो
जाओ
अब
मरने
वाले
हो
तुम
याद
करो
दुनिया
में
आकर
रोया
था
तुम
ने
Kabir Altamash
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अब
उसको
भी
मेरी
आदत
है
बोल
रहा
था
जो
तू
आफ़त
है
ढूंढ
रहे
हैं
अब
भी
उनको
हम
जिनका
दिखना
यार
क़यामत
है
जिस
सेे
मुझको
यार
मोहब्बत
थी
उस
सेे
क्यूँ
मुझको
अब
नफ़रत
है
देखा
माँ
के
क़दमों
के
नीचे
नीचे
सचमुच
में
इक
जन्नत
है
इस
दुनिया
में
इक
ही
लड़की
है
जिसपर
दुनिया
भर
की
लानत
है
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Kabir Altamash
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कैसे
रहता
हूँ
तेरे
साथ
अभी
भी
मैं
कोई
होता
तो
कब
का
छोड़
गया
होता
Kabir Altamash
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मैंने
अब
तो
तन्हाई
को
भी
छोड़
दिया
इतना
तन्हा
कोई
ख़ुद
को
करता
है
क्या?
Kabir Altamash
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