kisi ke li.e KHud ko itnaa badalna zaroori nahin | किसी के लिए ख़ुद को इतना बदलना ज़रूरी नहीं

  - Harsh Kumar Bhatnagar
किसीकेलिएख़ुदकोइतनाबदलनाज़रूरीनहीं
अगरहैमोहब्बततोफिरकोईवा'दाज़रूरीनहीं
कहाँपूछतीहैख़िज़ाँआनेसेक़ब्लइनफूलोंसे
अगरदूरहोनाहैतुझकोतोलड़नाज़रूरीनहीं
यूँँबीतेपलोंकोतिरायादकरनामुनासिबहैपर
सहारेइसीकेहमेशाभीरहनाज़रूरीनहीं
सदाएकसपनेकेजैसेमिरीआँखोंमेंरहतीहै
उसेढूँडनेकेलिएकोईनक़्शाज़रूरीनहीं
ख़ुदानेलिखाहैतोकुछसोचकरहीलिखाहोगादोस्त
वगरनाग़मोंकामुक़द्दरमेंहोनाज़रूरीनहीं
मैंहीक्यूँयेहिजरतकोकाँधेपेडालेफिरूँबरसोंतक
फ़क़तराह-ए-उल्फ़तमेंबसमेरामरनाज़रूरीनहीं
कलाकारकोज़ातसेफ़र्क़पड़तानहींहैकोई
तिराभीज़मानेकोदुखड़ासुनानाज़रूरीनहीं
  - Harsh Kumar Bhatnagar
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