hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Harsh Kumar Bhatnagar
kaar-e-ishq se pahle ye dil kya tha
kaar-e-ishq se pahle ye dil kya tha | कार-ए-इश्क़ से पहले ये दिल क्या था
- Harsh Kumar Bhatnagar
कार-ए-इश्क़
से
पहले
ये
दिल
क्या
था
अब्र
में
छुपे
सितारे
के
जैसा
था
तेरे
छूते
ही
सब्ज़
हो
गया
हूँ
मैं
तो
पतझड़
के
मौसम
जैसा
था
- Harsh Kumar Bhatnagar
Download Sher Image
तेरी
यादों
की
धूप
आने
लगी
है
अभी
खुल
जाएगा
मौसम
हमारा
Subhan Asad
Send
Download Image
35 Likes
तुम्हारे
शहर
का
मौसम
बड़ा
सुहाना
लगे
मैं
एक
शाम
चुरा
लूँ
अगर
बुरा
न
लगे
Qaisar-ul-Jafri
Send
Download Image
94 Likes
मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
Send
Download Image
40 Likes
आप
जो
ठीक
समझते
हैं
वो
करिए
साहब
ऐसे
मौसम
में
मैं
दफ़्तर
तो
नहीं
आ
सकता
Vashu Pandey
Send
Download Image
28 Likes
जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
Send
Download Image
39 Likes
तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
Read Full
Dev Niranjan
Send
Download Image
35 Likes
मेरी
आँखों
से
बारिश
पूछती
है
तुम्हारा
क्या
कोई
मौसम
नहीं
है
100rav
Send
Download Image
8 Likes
तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
330 Likes
न
उन
लबों
पे
तबस्सुम
न
फूल
शाख़ों
पर
गुज़र
गए
हैं
जो
मौसम
गुज़रने
वाले
थे
Kaif Uddin Khan
Send
Download Image
22 Likes
तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
Read Full
Bashir Badr
Send
Download Image
45 Likes
Read More
दिल
को
पत्थर
भी
बनाना
पड़ता
है
हाथ
अपनों
से
छुड़ाना
पड़ता
है
Harsh Kumar Bhatnagar
Send
Download Image
2 Likes
मैं
देख
कर
हुजूम
ज़रा
भी
डरा
नहीं
वहशत
भला
है
क्या
मैं
ये
भी
जानता
नहीं
तू
ज़ख़्म
ऐसा
दे
कि
मुसलसल
हो
ग़म
मुझे
मैं
जी
रहा
हूँ
इश्क़
में
तेरे
मरा
नहीं
वो
गीत
गाता
फिरता
है
मातम
पे
लोगों
के
ग़म
टूट
कर
बिखरने
का
वो
जानता
नहीं
परवाज़
माँगता
है
वो
शाहीन
की
तरह
जो
ख़ुद
कभी
पहाड़
के
ऊपर
चढ़ा
नहीं
Read Full
Harsh Kumar Bhatnagar
Download Image
2 Likes
हम
गली
से
उसकी
कुछ
आँसू
बहा
के
निकले
हैं
इश्क़
कितना
है
हमें
सब
सच
बता
के
निकले
हैं
उसकी
मर्ज़ी
है
वो
चाहे
या
न
चाहे
हम
को
पर
उसकी
ख़ातिर
हम
तो
अपना
सब
लुटा
के
निकले
हैं
Read Full
Harsh Kumar Bhatnagar
Send
Download Image
2 Likes
पेड़
के
नीचे
कब
से
बैठा
हूँ
वो
गया
जब
से
तब
से
बैठा
हूँ
शे'र
पढ़ना
मिरा
भी
बाक़ी
है
इसलिए
मैं
अदब
से
बैठा
हूँ
Read Full
Harsh Kumar Bhatnagar
Send
Download Image
3 Likes
मालूम
है
सब
को
मुझे
क्या
चाहिए
ग़म
चाहिए
पर
थोड़ा
ज़्यादा
चाहिए
आसानी
से
तर्क-ए-मोहब्बत
क्यूँ
करें
अब
तो
हमें
कोई
तमाशा
चाहिए
गूँगों
के
आगे
शे'र
कह
सकता
नहीं
अब
दाद
देने
वाला
मज्मा
चाहिए
मैं
इश्क़
का
इज़हार
भी
कैसे
करूँँ
इज़हार
करने
को
कलेजा
चाहिए
तू
क़ैद
से
आज़ाद
कर
देना
मुझे
पर
उस
सेे
पहले
ज़ख़्म
गहरा
चाहिए
मेरे
ख़ुदा
बस
एक
ख़्वाहिश
है
मिरी
हाथों
से
तेरे
एक
लुक़्मा
चाहिए
Read Full
Harsh Kumar Bhatnagar
Download Image
3 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Political Shayari
Hunar Shayari
Kitab Shayari
Dariya Shayari
Bekhayali Shayari