guzre hue maah o saal ke gham | गुज़रे हुए माह ओ साल के ग़म

  - Mahmood Ayaz
गुज़रेहुएमाहसालकेग़म
तन्हाईशबमेंजागउट्ठेहैं
उम्र-ए-रफ़्ताकीजुस्तुजूमें
अश्कोंकेचराग़जलरहेहैं
आसाइश-ए-ज़िंदगीकीहसरत
माज़ीकानक़्शबनचुकीहै
हालातकीना-गुज़ीरतल्ख़ी
एकएकनफ़समेंबसगईहै
नाकामी-ए-आरज़ूकोदिलने
तस्लीमरज़ाकेनामबख़्शे
मिलनेकीख़ुशीबिछड़नेकाग़म
क्याक्याथेफ़रेब-ए-ज़िंदगीके
इकउम्रमेंअबसमझसकेहैं
ख़ुशियोंकाफ़ुसूँगुरेज़पाहै
अबतर्कदु'आकीमंज़िलेंहैं
दामान-ए-तलबसिमटचुकाहै
नाकामी-ए-शौक़मिटतेमिटते
जीनेकाशुऊरदेगईहै
येग़महैनवाएशबकाहासिल
येदर्दमता-ए-ज़िंदगीहै
उजड़ीहुईहररविशचमनकी
देतीहैसुराग़रंगबूका
वीरानहैंज़िंदगीकीराहें
रौशनहैचराग़आरज़ूका
  - Mahmood Ayaz
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