tamaam shab ki dukhan be-kali subuk khwaabi | तमाम शब की दुखन, बे-कली, सुबुक ख़्वाबी

  - Mahmood Ayaz
तमामशबकीदुखन,बे-कली,सुबुकख़्वाबी
नुमूद-ए-सुब्हकोदरमाँसमझकेकाटीहै
रगोंमेंदौड़तेफिरतेलहूकीहरआहट
अजल-गिरफ़्ताख़यालोंकोआसदेतीहै
मगरवोआँखजोसबदेखतीहै
हँसतीहै
उफ़ुक़सेसुब्हकीपहलीकिरनउभरतीहै
तमामरातकीफ़रियादइकसुकूतमेंचुप
तमामशबकीदुखन,बे-कली,सुबुक-ख़्वाबी
हरीरीपर्दोंकीख़ामोशसिलवटोंमेंगुम
जोआँखज़िंदाथी
ख़ामोशछतकोतकतीहै
औरएकआँखजोसबदेखतीहै
हँसी
नुमूद-ए-सुब्हकीज़रताररौशनीकेसाथ
महकतेफूलदरीचेसेझाँककरदेखें
तूमेज़दरपेकिसीदर्दकानिशाँमिले
उगालदानदवाओंकीशीशियाँपंखा
कुँवारीमाँकातबस्सुम,सलीबआवेज़ां
हरएकचीज़ब-दस्तूरअपनीअपनीजगह
नएमरीज़कीआमदकाइंतिज़ारकरे
औरएकआँखजोसबदेखतीहै
हँसतीरहे.
  - Mahmood Ayaz
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