aaine kahte hain is KHvaab ko rusva na karo | आइने कहते हैं इस ख़्वाब को रुस्वा न करो

  - Mahboob Khizan
आइनेकहतेहैंइसख़्वाबकोरुस्वाकरो
ऐसेखोएहुएअंदाज़सेदेखाकरो
कैसेजातीहैकोंपलपेयेजादूकीलकीर
दिनगुज़रजातेहैंमहसूसकरोयाकरो
कहींदीवार-ए-क़यामतकभीज़ंजीर-ए-अज़ल
क्याकरोइश्क़-ए-ज़ियाँ-ए-केशमेंऔरक्याकरो
भागतेजाओकिसीसम्तकिसीसाएसे
तज़्किराएकहैअफ़्साना-दर-अफ़्सानाकरो
फिरकोईताज़ाघरौंदाकिसीवीरानेमें
गाँवकोशहरकरोशहरकोवीरानाकरो
बज़्म-ए-इम्काँहुईदोघूँटलहूआँखोंमें
हिर्सकहतीहैकिकौनैनकोपैमानाकरो
क्यूँँहोमुझसेशिकायततुम्हींतुमवोहोकिफिर
उसेजीताभीछोड़ोजिसेदीवानाकरो
एकहीरातसहीफूलतोखुलतेहैं'ख़िज़ाँ'
मौतमेंक्याहैकिजीनेकीतमन्नाकरो
  - Mahboob Khizan
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