be-zabaanon ki kahaanii ki zabaan hote rahe | बे-ज़बानों की कहानी की ज़बाँ होते रहे

  - Madhukar Jha Khuddar
बे-ज़बानोंकीकहानीकीज़बाँहोतेरहे
हमतोयारोबारहाअश्क-ए-रवाँहोतेरहे
दिलपेचाहेजितनेख़ंजरहोलगेजान-ए-जाँ
उसगलीमेंहमसरासरराएगाँहोतेरहे
जामऐसाडालसाक़ीज़हरसाअबपीसकर
आजउसकोदेखसबजल्वेअयाँहोतेरहे
जानमक़्तलपरलुटादीबे-सबब'ख़ुद्दार'ने
जुर्मउसकेलन-तरानीसेबयाँहोतेरहे
इसनगरमेंबे-असरबादा-कशी'ख़ुद्दार'की
वोजानेकिनग़मोंमेंना-तवाँहोतेरहे
  - Madhukar Jha Khuddar
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