vo jis ke aane hi se bazm raushni se bhar gaii | वो जिस के आने ही से बज़्म रौशनी से भर गई

  - Madhav Jha
वोजिसकेआनेहीसेबज़्मरौशनीसेभरगई
कहाँसेआईथीयहाँवोकौनथीकिधरगई
बदनभलेहसीनथामगरतूमेरेवस्लसे
ज़रातोदेखआइनेमेंकिसक़दरनिखरगई
हरएकशयहुईतबाहहरकिसीकादिलहलाक
जिधरकहींभीएकदफ़ाहुस्नकीनज़रगई
मैंफ़ाइलोंमेंइसक़दरकईदिनोंसेउलझाथा
क़ज़ाभीआईइंतिज़ारकरकेथककेघरगई
अमीरकेबयानोंकोहीमानतेहैंसचसभी
येमुफ़्लिसीतोदेखोमेराहीशिकारकरगई
अगनबढ़ानाचाहताथाहिज्रकीमैंजिसक़दर
उधरबहारआईऔरवोमेराकामकरगई
  - Madhav Jha
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