ho zamaana udhar idhar ham tum | हो ज़माना उधर इधर हम तुम

  - Madhav Jha
होज़मानाउधरइधरहमतुम
एक-दूजेकेदिल-जिगरहमतुम
दिलकीमंज़िलकेहम-सफ़रहमतुम
होकेदुनियासेबे-ख़बरहमतुम
आसमाँसेजोदेखेचाँदकभी
चाँदकोआएबसनज़रहमतुम
वस्लकीरातमुख़्तसरसीलगी
रहेबातोंमेंरातभरहमतुम
आएकोईशिकनचेहरेपर
रास्तेमेंमिलेंअगरहमतुम
वक़्तीहरशयहैइसजहाँमेंपरइश्क़केदह्रमेंअमरहमतुम
  - Madhav Jha
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy