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Madhav Awana
badaa aasaan hai mere li.e
badaa aasaan hai mere li.e | बड़ा आसान है मेरे लिए
- Madhav Awana
बड़ा
आसान
है
मेरे
लिए
मैं
आज़ादी
के
गीत
गाऊँ
और
सड़कों
पर
जलसे
सजा
इंक़लाब
के
नारे
लगाऊँ
बड़ा
आसान
है
मेरे
लिए
मैं
किसी
पर
ज़ुल्म
होता
पाऊँ
तो
आँखों
वाला
अंधा
हो
जाऊँ
बड़ा
आसान
है
मेरे
लिए
सियासतदानों
पर
झल्लाऊँ
और
कुछ
करने
के
नाम
पर
अपनी
मजबूरियाँ
गिनाऊँ
बड़ा
आसान
है
मेरे
लिए
कि
मैं
ज़िंदा
लाश
हो
जाऊँ
ख़ुद
डरूँ
और
परिवार
को
डराऊँ।
पर
मेरे
भीतर
जो
है
एक
रूह
सी
जब
पूछती
है
मुझ
से
कहाँ
जाऊँ
ज़िंदा
लाश
होना
भी
आसान
नहीं
मैं
इसे
कैसे
समझाऊँ
- Madhav Awana
हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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इस
गए
साल
बड़े
ज़ुल्म
हुए
हैं
मुझ
पर
ऐ
नए
साल
मसीहा
की
तरह
मिल
मुझ
से
Sarfraz Nawaz
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मुझको
भी
ज़िद
करने
का
हक़
दो
साहब
मेरे
भीतर
भी
इक
बच्चा
रहता
है
Atul K Rai
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ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
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और
बेहतर,
और
बेहतर,
और
बेहतर
का
ये
खेल
मुझ
सेे
मेरे
शे'र
की
मासूमियत
ले
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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