tanduruston men na beemaaron ke beech | तंदुरुस्तों में न बीमारों के बीच इश्क़ के हूँ मैं दिल-अफ़गारों के बीच

  - Maatam Fazl Mohammad
तंदुरुस्तोंमेंबीमारोंकेबीचइश्क़केहूँमैंदिल-अफ़गारोंकेबीच
इश्क़हैसैर-ए-ख़ुदादोस्ताँ
इसलिएअशरफ़हैअसरारोंकेबीच
मंज़िल-ए-दूर-ओ-दराज़-ए-इश्क़में
ग़मकोपायाहमनेग़म-ख़्वारोंकेबीच
दोस्ताँहैला-दवादूर-अज़-शिफ़ाइश्क़काआज़ारआज़ारोंकेबीच
अबतोहैकुंज-ए-क़फ़सघरपरकभी
बुलबुलोथेहमभीगुलज़ारोंकेबीच
क्याकहेंहमकहनहींसकतेहैंयार
अंदकोंमेंहैकिबिस्यारोंकेबीच
जिसकेजूयामोमिनमुशरिकहैंवो
सुब्बहोंमेंहैज़ुन्नारोंकेबीच
रहमकरहमपरभीदिल-बरहैंतिरेइश्क़केहाथोंसेआवारोंकेबीच
गुलनेतादावाकियारुख़सेतिरे
बे-क़दरबकताहैबाज़ारोंकेबीच
याहुसैन-इब्न-ए-अली'मातम'कोभी
कीजेदाख़िलअपनेज़व्वारोंकेबीच
  - Maatam Fazl Mohammad
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