ila ya shah-e-khooban keejie shaad | इला या शाह-ए-ख़ूबाँ कीजिए शाद

  - Maatam Fazl Mohammad
इलायाशाह-ए-ख़ूबाँकीजिएशाद
हुएजातेहैं'आशिक़ग़मसेबर्बाद
हमेंतुमयादहोहरलहज़ालेकिन
हमारीभीकभीतोकीजिएयाद
गिरफ़्तार-ए-बलाबालाएतूयार
ग़म-ए-दौराँसेहैंजूँसर्वआज़ाद
अगरलैलाहैतूमजनूँहैंहम
वगरशीरींहैतूहमहैंफ़रहाद
वहीईरादकरसकताहैआख़िर
कियाहैजिसनेअव्वलहमकोईजाद
किसीशयकोदरुस्त-ओ-चुस्तदाएम
देखादर-जहान-ए-सुस्तबुनियाद
शे'रहैअश्क-ए-चश्म-ओ-लख़्त-ए-दिलसे
उठायाचाहिएहम-आबहम-ज़ाद
गुल-ए-तरख़ारसेसमझेंबतर-तर
जोदेखेंअंदलीबाँरोतेसय्याद
गुलू-ए-गुलतोपकड़ेआख़िर-कार
गएकबराएगाँबुलबुलकेफ़रियाद
अबसकरतेहोबहर-ए-तर्कतकरार
अज़ीज़ोहूँमैंदुख़्त-ए-रज़कादामाद
नहींजिसरोज़मीआ'दआमद-ए-यार
वहीहमजानतेहैंरोज़-ए-मीआ'द
बहुतफ़रज़ानाथेदीवानेहमको
बनाएशोख़तिफ़्लान-ए-परी-ज़ाद
हमलमिर्रीख़माशूक़ोंनेमेरा
कियाहैसरजुदाअज़तेग़-ए-बे-दाद
हज़ाराँशुक्रमुल्क-ए-सिंधमेंभी
मिरामस्कनहैशहर-ए-हैदराबाद
जनाबहैदर-ए-सफ़दरसे'मातम'
तलबऔक़ात-ए-मुश्किलमेंकरइमदाद
  - Maatam Fazl Mohammad
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