bujha chuki hai hawa jis ko vo diya bhi main | बुझा चुकी है हवा जिस को वो दिया भी मैं

  - M R Qasmi
बुझाचुकीहैहवाजिसकोवोदियाभीमैं
मगरयेदेखबहुतदेरतकजलाभीमैं
तवीलधूपकीशिद्दतहवाओंकीयूरिश
सहीभीमैंनेसर-ए-दश्त-ए-ग़मखिलाभीमैं
मिलेक़यामकेअहकामभीमुझीकोयहाँ
मसाफ़तोंकापरस्तारएकथाभीमैं
मेरेनसीबमेंपतझड़केरास्तोंकासफ़र
सदा-बहारदयारोंसेआश्नाभीमैं
मुझीसेआईथीमिलनेउदासचाँदनीरात
अगरयेजानताहोतातोजागताभीमैं
मेरीतरफ़थींकभीबारिशेंभीफूलोंकी
हिसार-ए-संग-ओ-सदामेंघिराहुआभीमैं
येसोचताहूँकहूँख़ुदको'क़ासमी'मैंक्या
सुकूतभीमेरेअंदरबहुतसदाभीमैं
  - M R Qasmi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy