talwaar le rahe the himayat men phool ki | तलवार ले रहे थे हिमायत में फूल की

  - Lutf-ur-rahman
तलवारलेरहेथेहिमायतमेंफूलकी
पतझड़केमोर्चोंमेंअजबहमनेभूलकी
अपनेलहूसेशामकोसैराबकरदिया
दिनभरकेइंतिज़ारकीक़ीमतवसूलकी
बिखराहैइसतरहसेहरइकज़र्रा-ए-वजूद
सूरतनहींहैकोईभीअपनेहुसूलकी
हमदर्दियोंकेतीरसेज़ख़्मीकरमज़ीद
हमनेतोख़ुदचुनीथींयेराहेंबबूलकी
ख़ुशबूकीतरहहमहैंख़राबीमेंदहरकी
येशाख़-ए-गुलपलीथीफ़ज़ाओंमेंधूलकी
  - Lutf-ur-rahman
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