kisi girdaab ki phenki padi hai | किसी गिर्दाब की फेंकी पड़ी है

  - Liaqat Jafri
किसीगिर्दाबकीफेंकीपड़ीहै
लब-ए-साहिलजोइककश्तीपड़ीहै
हक़ीक़तमेंवहीसीधीपड़ीहै
मुझेइकचालजोउल्टीपड़ीहै
सफ़रउलझादिएहैंउसनेसारे
मिरेपैरोंमेंजोतेज़ीपड़ीहै
वोहंगामागुज़रजाताउधरसे
मगररस्तेमेंख़ामोशीपड़ीहै
मिरेकानोंकीज़दपरहैंमनाज़िर
मिरीआँखोंमेंसरगोशीपड़ीहै
हुआहैक़त्लबेदारीकाजबसे
येबस्तीरातदिनसोईपड़ीहै
येमिस्रामैंअधूराछोड़ताहूँ
मिरेबस्तेमेंइकतख़्तीपड़ीहै
पतंगकटनेकाबाइसऔरहैकुछ
अगरचेडोरभीउलझीपड़ीहै
ज़राकोयलकापिंजराखुलगयाथा
अभीतकख़ौफ़सेसहमीपड़ीहै
मुकम्मलएकदुनियाऔरभीहै
जोइकदुनियाकीअन-देखीपड़ीहै
बड़ीबंजरथीयेखेती'लियाक़त'
मगरकुछरोज़सेसींचीपड़ीहै
  - Liaqat Jafri
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