musalsal ashk-baari kar raha tha | मुसलसल अश्क-बारी कर रहा था

  - Liaqat Jafri
मुसलसलअश्क-बारीकररहाथा
मैंअपनीआबियारीकररहाथा
मुझेवोख़्वाबफिरसेदेखनाथा
मैंख़ुदपेनींदतारीकररहाथा
कईदिनतकथामेरीदस्तरसमें
मैंअबदरियाकोजारीकररहाथा
मुझेरुकरुककेपंछीदेखतेथे
मैंपत्थरपरसवारीकररहाथा
गुज़रनाथाबहुतमुश्किलउधरसे
दरीचाचाँद-मारीकररहाथा
कोईएटमथामेरेजिस्म-ओ-जाँमें
मैंजिसकीताब-कारीकररहाथा
सफ़ीनेसबकेसबग़र्क़ाबकरके
समुंदरआह-ओ-ज़ारीकररहाथा
मुझेफ़ितरतभीघिसतीजारहीथी
मैंख़ुदभीरेग-मारीकररहाथा
मेरीड्यूटीथीख़ेमोंकीहिफ़ाज़त
मगरमैंआब-दारीकररहाथा
सितारेटिमटिमानारुकगएथे
मैंफिरअख़्तर-शुमारीकररहाथा
मुझेभिड़नाथाकिसवहशीसेलेकिन
मैंकिसपागलसेयारीकररहाथा
बहुतसेकामकरनेथे'लियाक़त'
जिन्हेंमैंबारीबारीकररहाथा
  - Liaqat Jafri
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