kya shab-e-gham mirii basar na hui | क्या शब-ए-ग़म मिरी बसर न हुई

  - Lateef Nazi
क्याशब-ए-ग़ममिरीबसरहुई
तुमआएतोक्यासहरहुई
शाम-ए-ग़मकीकभीसहरहुई
जोदु'आकीवोकार-गरहुई
शब-ए-फ़ुर्क़ततवीलथीजितनी
औरकोईरातइसक़दरहुई
थीनिगाह-ए-करमरक़ीबोंपर
उम्रभरवोकभीइधरहुई
क्याकहूँअपनीना-मुरादी-ए-दिल
किमोहब्बतभीमो'तबरहुई
मिरीबर्बादियोंकेक़िस्सोंपर
कबज़मानेकीआँखतरहुई
शब-ए-वा'दावोगए'नाज़ी'
शुक्रहैकुछअगर-मगरहुई
  - Lateef Nazi
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