na koi KHvaab hogaa aur na KHvaabon ka jahaan hogaa | न कोई ख़्वाब होगा और न ख़्वाबों का जहाँ होगा

  - Lateef Ahmad Subhani
कोईख़्वाबहोगाऔरख़्वाबोंकाजहाँहोगा
कोईदिलमेंनहींहोगातोदिलख़ालीमकाँहोगा
बहुतहीसोचकरतूकश्ती-ए-उम्र-ए-रवाँकोडाल
मुक़ाबिलमेंतलातुम-ख़ेज़बहर-ए-बे-कराँहोगा
नहींहैदूरवोमंज़रजिसेदेखेगायेआलम
मुसलमाँइकतरफ़औरइकतरफ़साराजहाँहोगा
येदौर-ए-पुर-फ़ितनहैबोझअपनाख़ुदउठाओतुम
तुम्हारादर्दबाँटेगाकोईमेहरबाँहोगा
रईसोंऔरलुटेरोंकाज़मानाहैग़रीबोतुम
कभीमतसोचनातुमपरज़मानामेहरबाँहोगा
चट्टानोंकीतरहमैंअज़्मरखताहूँ'लतीफ़'अबके
मुझेमालूमहैहरइकक़दमपरइम्तिहाँहोगा
  - Lateef Ahmad Subhani
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