aks-dar-aks hai chehron ki numoodaari se | अक्स-दर-अक्स है चेहरों की नुमूदारी से

  - Lateef Ahmad Subhani
अक्स-दर-अक्सहैचेहरोंकीनुमूदारीसे
आइनादेखतेहैंलोगभीबे-ज़ारीसे
फिरभीइल्ज़ामकईगएसरपरअपने
मैंगुरेज़ाँतोरहावक़्तकीअय्यारीसे
बुग़्ज़हैहिर्सहैग़ीबतहैरिया-कारीहै
जिसक़दरभीहोरहोदूरहीबीमारीसे
बटकेरहजाताहैइंसानकईहिस्सोंमें
मश्ग़लेपैदाअजबहोतेहैंबेकारीसे
बे-सबबगिरतानहींआदमीनज़रोंसेकभी
बद-कलामीकेसबबयाकभीमक्कारीसे
ना-मुकम्मलहैग़ज़लग़मकीमहारतकेबग़ैर
हुस्नआताहैकहाँशे'रोंमेंफ़नकारीसे
लोगगिरवीदामिरेयूँँहीनहींआज'लतीफ़'
दिलकोजीताहैरवाबितसेरवा-दारीसे
  - Lateef Ahmad Subhani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy