husn par zeba nahin ye lan-taraani aap ki | हुस्न पर ज़ेबा नहीं ये लन-तरानी आप की

  - Lala Madhav Ram Jauhar
हुस्नपरज़ेबानहींयेलन-तरानीआपकी
चारदिनकीचाँदनीहैनौजवानीआपकी
हमभीकुछमुँहसेजोकहबैठेंतोफिरकितनीरहे
देखिएअच्छीनहींयेबद-ज़बानीआपकी
कुछसमझमेंहालयेआतानहींहैरानहूँ
आजहैकैसीयेमुझपरमेहरबानीआपकी
बाज़आएहमयेअपना-आपछल्लालीजिए
हरकिसीकेहाथमेंहैअबनिशानीआपकी
राहमेंभीदेखकरमुँहफेरलेतेहैंहुज़ूर
आजकलहैकिसक़दरना-मेहरबानीआपकी
दोघड़ीइकरंगपरक़ाएमनहींहुस्न-ए-शबाब
क्यामुसव्विरखींचेतस्वीर-ए-जवानीआपकी
आब-ए-हैवाँहैकहींज़हर-ए-हलाहलहैकहीं
तल्ख़-गोईआपकीशीरीं-ज़बानीआपकी
ख़्वाबमेंहमकोआनेदेतेतोहमजानते
कीरक़ीबोंनेयेकैसीपासबानीआपकी
अपनेमरनेकानहींग़मरंजहैइसबातका
आजउँगलीसेउतरतीहैनिशानीआपकी
हाल-ए-दिलसुनतेनहींयेकहकेख़ुशकरदेतेहैं
फिरकभीफ़ुर्सतमेंसुनलेंगेकहानीआपकी
हमकोयेदौलतकभीमिलतीतोहमभीजानते
होगीजिसकेवास्तेहोगीजवानीआपकी
  - Lala Madhav Ram Jauhar
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