jalwa-e-husn-e-azal aa.e tasavvur men agar | जल्वा-ए-हुस्न-ए-अज़ल आए तसव्वुर में अगर

  - Lala Anoop Chand Aaftab Panipati
जल्वा-ए-हुस्न-ए-अज़लआएतसव्वुरमेंअगर
गोशा-ए-दिलमेंमचलतेहुएअरमाँहोंगे
इकहसींगोर-ए-ग़रीबाँपेहुआयूँँगोया
येभीकम्बख़्तकभीहज़रत-ए-इंसाँहोंगे
पाँवरखतेभीनज़ाकतसेअगरहोंगेकहीं
बे-बदलहुस्न-ए-जहाँ-सोज़पेनाज़ाँहोंगे
फूलबिस्तरपेबिछानेकोअगरहासिलथे
सैरकेवास्तेबाग़औरगुलिस्ताँहोंगे
इत्रमलनेकेलिएकपड़ेबदलनेकेलिए
महल-ओ-ऐवाँमेंबहुतदस्त-ए-हसीनाँहोंगे
नित-नईरोज़मुयस्सरथीउन्हेंबज़्म-ए-सुरूद
दिलबहलनेकेलिएसैंकड़ोंसामाँहोंगे
एकलम्हाभीगुज़रताथाजोतन्हाईमें
मुज़्तरिबऔरपरेशानयेज़ीशाँहोंगे
गोर-ओ-मर्क़दपेयूँँहीसैरकोआतेहोंगे
औरसीनोंमेंलिएहसरत-ओ-अरमाँहोंगे
क्याख़बरथीकिउजड़जाएगागुलज़ार-ए-हयात
एकझोंकेसेहवाकेयेसामाँहोंगे
क्यायूँँहीमौतमिटाएगीजहाँसेहमको
क्यायूँँहीअपनेलिएदश्त-ओ-बयाबाँहोंगे
ज़िंदगीमेंकरेंगेजोबशरकार-ए-सवाब
वक़्त-ए-रुख़्सतवोपरेशान-ओ-पशेमाँहोंगे
'आफ़्ताब'उनकीसमझताहूँहयात-ए-अबदी
जोबशरधर्मपेसौ-जानसेक़ुर्बांहोंगे
  - Lala Anoop Chand Aaftab Panipati
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