zameer-o-zehen se ki hain bagaavatein kya kya | ज़मीर-ओ-ज़ेहन से की हैं बगावतें क्या क्या

  - Lais Quraishi
ज़मीर-ओ-ज़ेहनसेकीहैंबगावतेंक्याक्या
मुनाफ़िक़ोंसेनिभाईंरिफाक़तेंक्याक्या
हयातअर्सा-ए-कर्ब-ओ-बलामेंगुज़रीहै
तमाम-उम्रहुईहैंशहादतेंक्याक्या
किसीसेप्यारकिसीसेवफ़ाकिसीसेख़ुलूस
बिगड़गईहैंहमारीभीआदतेंक्याक्या
येजब्रहैकिग़रज़सेग़रज़बदलतेहैं
हमेंअज़ीज़थींवर्नाशराफ़तेंक्याक्या
मिज़ाज-ए-वक़्तनेछीनाहैमुझसेमेरामिज़ाज
गुज़रतीरहतीहैंदिलपरक़यामतेंक्याक्या
सबापेहर्फ़आएकिरनकादिलदुखे
शगुफ़्तागुलकेलिएहैंनज़ाकतेंक्याक्या
येऔरबातसमझनेसेहमहैंक़ासिर'लैस'
जबीन-ए-वक़्तपरदेखींइबारतेंक्याक्या
  - Lais Quraishi
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