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Kushal "PARINDA"
jo log mere harfon par daad de rahe hain
jo log mere harfon par daad de rahe hain | जो लोग मेरे हर्फ़ों पर दाद दे रहे हैं
- Kushal "PARINDA"
जो
लोग
मेरे
हर्फ़ों
पर
दाद
दे
रहे
हैं
बर्बाद
हैं
इश्क़
में
सब
ये
देख
लग
रहा
है
- Kushal "PARINDA"
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किसी
के
इश्क़
में
बर्बाद
होना
हमें
आया
नहीं
फ़रहाद
होना
Manish Shukla
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नई
नस्लें
समझ
पाएँ
मुहब्बत
के
मआनी
हमें
इस
वास्ते
भी
शा'इरी
करनी
पड़ेगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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मेरा
इन
इश्क़
की
गलियों
से
अब
कुछ
यूँँ
गुज़रना
है
हो
पागल
इश्क़
में
तेरे
तेरी
चौखट
पे
मरना
है
Kushal "PARINDA"
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सलीक़े
से
निभाना
चाहते
हैं
किसी
रुत
को
सजाना
चाहते
हैं
हमें
आदत
है
दिल
को
भी
जलाना
मगर
तुमको
बचाना
चाहते
हैं
उजालों
की
तलब
रखते
हैं
फिर
भी
अँधेरों
में
ठिकाना
चाहते
हैं
जो
हमको
रूह
से
बढ़कर
कभी
थी
उसे
अब
भूल
जाना
चाहते
हैं
जो
अपनी
बात
करता
है
ग़ज़ल
में
उसे
ही
आज़माना
चाहते
हैं
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Kushal "PARINDA"
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तराशा
इश्क़
से
मुझको
मगर
मैं
अश्म
अच्छा
जो
रहा
बुत
इश्क़
में
कहकर
रुला
देगी
यही
दुनिया
Kushal "PARINDA"
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जहाँ
पर
फूल
बिखरें
हैं
वहीं
पर
टेकना
माथा
कहीं
मस्जिद
कहीं
मन्दिर
किसी
ने
तोड़
डाला
हैं
Kushal "PARINDA"
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वो
जब
से
दूर
है
दिल
रो
रहा
है
सुकूँ
का
अब
निशाँ
ही
खो
रहा
है
जुदाई
भी
मुझे
मंज़ूर
होती
अगर
वो
कह
के
मुझ
सेे
हो
रहा
है
मैं
कोशिश
कर
रहा
हूँ
थाम
लूँ
कुछ
मगर
हर
पल
मुझे
ही
धो
रहा
है
कभी
लब
ख़ामुशी
से
बोलते
हैं
कि
दिल
अंदर
ही
अंदर
रो
रहा
है
परिंदा
रह
गया
बस
नाम
जैसा
जो
उड़ना
था
कहीं
अब
खो
रहा
है
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Kushal "PARINDA"
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