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Kushal Dauneria
ki tere baad bhi zinda hoon main mara to nahin
ki tere baad bhi zinda hoon main mara to nahin | कि तेरे बाद भी ज़िंदा हूॅं मैं मरा तो नहीं
- Kushal Dauneria
कि
तेरे
बाद
भी
ज़िंदा
हूॅं
मैं
मरा
तो
नहीं
हसीन
है
तू
मेरी
जाॅं
मगर
ख़ुदा
तो
नहीं
वो
लाल
रंग
बड़ा
खिल
रहा
था
तुझ
पर
कल
तू
रात
आग
लगाते
हुए
जला
तो
नहीं
बुलंदियों
के
वरक़
पर
कुशल
कहीं
तू
ने
उसे
बनाने
में
ख़ुद
को
मिटा
दिया
तो
नहीं
- Kushal Dauneria
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मैं
ने
हाथों
से
बुझाई
है
दहकती
हुई
आग
अपने
बच्चे
के
खिलौने
को
बचाने
के
लिए
Shakeel Jamali
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पास
हमारे
आकर
वो
शर्माती
है
तब
जाकर
के
एक
ग़ज़ल
हो
पाती
है
उसको
छूना
छोटा
मोटा
खेल
नहीं
गर्मी
क्या
सर्दी
में
लू
लग
जाती
है
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Tanoj Dadhich
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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कभी
इश्क़
करो
और
फिर
देखो
इस
आग
में
जलते
रहने
से
कभी
दिल
पर
आँच
नहीं
आती
कभी
रंग
ख़राब
नहीं
होता
Saleem Kausar
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आप
दस्ताने
पहनकर
छू
रहे
हैं
आग
को
आप
के
भी
ख़ून
का
रंग
हो
गया
है
साँवला
Dushyant Kumar
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अपने
बदन
की
तुम
भी
हिफ़ाज़त
न
कर
सके
हम
ने
भी
ख़ूब
ग़ैर
के
चूल्हे
से
आग
ली
Harsh saxena
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इक
बर्फ़
सी
जमी
रहे
दीवार-ओ-बाम
पर
इक
आग
मेरे
कमरे
के
अंदर
लगी
रहे
Salim Saleem
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ये
मज़ा
था
दिल-लगी
का
कि
बराबर
आग
लगती
न
तुझे
क़रार
होता
न
मुझे
क़रार
होता
Dagh Dehlvi
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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जिस्म
क़ैद
करती
है
वो
जान
छोड़
देती
है
मूल
मूल
रखती
है
लगान
छोड़
देती
है
जान-ए-जाँ
तुझे
पता
नहीं
महाज़-ए-इश्क़
में
बे-वफ़ाई
होंठ
पर
निशान
छोड़
देती
है
कैसे
हम
परिंदों
को
शिकारी
का
पता
लगे
तीर
छोड़ते
ही
वो
कमान
छोड़
देती
है
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Kushal Dauneria
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किसी
को
बनाने
में
क़िस्मत
तो
है
ही
मगर
अपने
हाथों
में
मेहनत
तो
है
ही
ये
मुमकिन
है
तुझको
हुनर
देख
चुन
लें
वगरना
तो
फिर
ख़ूब-सूरत
तो
है
ही
निकल
जाए
बाहर
ही
ग़ुस्सा
तो
अच्छा
कि
फिर
आप
के
घर
में
औरत
तो
है
ही
सभी
लड़कियाँ
छिप
गई
शाम
ढलते
कहो
कुछ
भी
मर्दों
की
दहशत
तो
है
ही
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Kushal Dauneria
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न
जाने
क्यूँँ
गले
से
लगने
की
हिम्मत
नहीं
होती
न
जाने
क्यूँँ
पिता
के
सामने
बेटे
नहीं
खुलते
Kushal Dauneria
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कल
शब
लिबास
उसने
जो
पहना
गुलाब
का
ख़ुशबू
गुलाब
की
कहीं
चर्चा
गुलाब
का
देखी
हसीन
लोगों
की
औलाद
भी
हसीन
पौधे
से
उगता
देखा
है
पौधा
गुलाब
का
मैं
था
गुलाब
तोड़ने
वालों
के
शहरस
और
उसको
चाहिए
था
बगीचा
गुलाब
का
सुनते
हो
आज
टूट
गया
लाडले
का
दिल
अब
उसके
आगे
ज़िक्र
न
करना
गुलाब
का
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Kushal Dauneria
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हुस्न
इक
गुलसिताँ
का
माली
है
आँख
शहतूत
बदन
डाली
है
मैंने
कुछ
देर
उदासी
हँस
कर
मारी
है
मार
नहीं
डाली
है
साज-ओ-श्रृंगार
से
चमकाया
बदन
एक
ही
नोट
वो
भी
जाली
है
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Kushal Dauneria
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