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Kush Pandey ' Saarang '
main khul kar ro nahin paaya kabhi bhi
main khul kar ro nahin paaya kabhi bhi | मैं खुल कर रो नहीं पाया कभी भी
- Kush Pandey ' Saarang '
मैं
खुल
कर
रो
नहीं
पाया
कभी
भी
वजह
है
अश्क
ज़ाया'
क्यूँँ
करूँँ
मैं
ये
अच्छा
है
शजर
इन्सा
नहीं
हैं
वगरना
कहते
साया
क्यूँँ
करूँँ
मैं
- Kush Pandey ' Saarang '
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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सब
परिंदों
से
प्यार
लूँगा
मैं
पेड़
का
रूप
धार
लूँगा
मैं
तू
निशाने
पे
आ
भी
जाए
अगर
कौन
सा
तीर
मार
लूँगा
मैं
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Tehzeeb Hafi
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एक
पत्ता
शजर-ए-उम्र
से
लो
और
गिरा
लोग
कहते
हैं
मुबारक
हो
नया
साल
तुम्हें
Unknown
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वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
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Zubair Ali Tabish
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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तुमको
फ़िराक-ए-यार
ने
मिस्मार
कर
दिया
मुझको
फ़िराक-ए-यार
ने
फ़नकार
कर
दिया
गुल
से
मुतालिबा
जो
किया
बोसे
का
शजर
गुल
ने
हिला
के
पत्तियाँ
इनकार
कर
दिया
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Shajar Abbas
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जिस
की
हर
शाख़
पे
राधाएँ
मचलती
होंगी
देखना
कृष्ण
उसी
पेड़
के
नीचे
होंगे
Bekal Utsahi
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यक़ीं
करते
हुए
भी
डर
रहा
हूँ
यक़ीं
ने
हाल
ऐसा
कर
दिया
है
Kush Pandey ' Saarang '
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ख़ुदी
को
चूमते
हैं
हम
हमें
बोसे
नहीं
मिलते
कहाँ
रोते
हमें
दुनिया
में
ही
कोने
नहीं
मिलते
Kush Pandey ' Saarang '
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प्यास
लगे
प्यासे
को
जब
भी
हाथ
मिरा
चुल्लू
हो
जाए
हर
के
ख़ातिर
उठते
हैं
ये
और
बड़े
बाज़ू
हो
जाए
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Kush Pandey ' Saarang '
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मुसीबत
की
ठोकर
हमें
जो
लगे
हैं
पता
चल
गया
कौन
कितने
सगे
हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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भुलाने
में
किसी
को
भी
पसीने
छूट
जाते
हैं
सफ़र
के
साथ
चलने
में
कबीले
छूट
जाते
हैं
अगर
क़िस्मत
हो
अच्छी
तब
समुंदर
साथ
चलता
है
बुरा
हो
वक़्त
तो
साहब
सफ़ीने
छूट
जाते
हैं
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Kush Pandey ' Saarang '
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