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Kush Pandey ' Saarang '
kaii ko eed pe iidii nahin milti
kaii ko eed pe iidii nahin milti | कई को ईद पे ईदी नहीं मिलती
- Kush Pandey ' Saarang '
कई
को
ईद
पे
ईदी
नहीं
मिलती
कमाए
बिन
यहाँ
रोटी
नहीं
मिलती
इराद-ए-ख़ुदकुशी
से
फ़ाइदा
क्या
है
हमें
जीने
से
ही
छुट्टी
नहीं
मिलती
- Kush Pandey ' Saarang '
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मिलना
हमारा
कम
हुआ
फिर
बात
कम
हुई
क़िस्तों
में
मुझ
ग़रीब
की
ख़ैरात
कम
हुई
Bhawana Srivastava
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पहली
ग़लती
पर
मत
छोड़ो
मुझको
तुम
पहली
रोटी
गोल
नहीं
बनती
जानाँ
Tanoj Dadhich
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उस
ने
वा'दा
किया
है
आने
का
रंग
देखो
ग़रीब
ख़ाने
का
Josh Malihabadi
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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सुनहरी
लड़कियों
इनको
मिलो
मिलो
न
मिलो
ग़रीब
होते
हैं
बस
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Abbas Tabish
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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हज़ारों
साल
नर्गिस
अपनी
बे-नूरी
पे
रोती
है
बड़ी
मुश्किल
से
होता
है
चमन
में
दीदा-वर
पैदा
Allama Iqbal
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ग़रीब
लोग
कहाँ
ख़ुद
को
बचा
पाएँगे
वबास
बच
भी
गए
भूख
से
मर
जाएँगे
Astitwa Ankur
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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ख़मोशी
के
मुक़ाबिल
कुछ
नहीं
है
तुम्हारे
सामने
दिल
कुछ
नहीं
है
तुम्हें
पाने
की
ख़्वाहिश
क्यूँँ
करें
हम
हमें
वैसे
भी
हासिल
कुछ
नहीं
है
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Kush Pandey ' Saarang '
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बड़ी
अच्छी
शरारत
कर
रही
थी
नज़र
से
वो
मुहब्बत
कर
रही
थी
किसी
के
नाम
को
लेकर
के
साहब
सहेली
से
शिकायत
कर
रही
थी
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Kush Pandey ' Saarang '
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जीने
की
बस
ज़िम्मेदारी
होती
है
हर
दिन
इसकी
ही
तैयारी
होती
है
इस
दुनिया
के
चक्कर
में
वो
छूट
गया
कैसे
कह
दें
दुनिया
प्यारी
होती
है
पक्षी
अक्सर
उड़
जाते
हैं
शाखों
से
डेरा
पेड़
की
ज़िम्मेदारी
होती
है
उसकी
मर्ज़ी
जिसको
चाहे
बोसा
दे
वैसे
सबकी
दावेदारी
होती
है
टूटा
होता
है
वो
हरदम
अंदर
से
जिसके
अंदर
भी
फ़नकारी
होती
है
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Kush Pandey ' Saarang '
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ख़ुदा
की
हम
पे
ये
रहमत
रही
है
भले
कम
ही
सही
इज़्ज़त
रही
है
रही
होगी
यहाँ
आसाँ
तुम्हारी
हमारी
ज़िन्दगी
आफ़त
रही
है
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Kush Pandey ' Saarang '
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निगाहें
यूँँ
मिला
लेती
थी
मुझ
सेे
लगा
मुझको
कि
जैसे
जानती
थी
Kush Pandey ' Saarang '
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