vo shab ke saath rahe ya sehar ka ho jaaye | वो शब के साथ रहे या सहर का हो जाए

  - Daagh Aligarhi
वोशबकेसाथरहेयासहरकाहोजाए
उसेयेहक़हैकिचाहेजिधरकाहोजाए
नज़रउठायेतोकरदेवोआफ़ताबकोराख
किसीकेबसमेंनहींउसनज़रकाहोजाए
छुपेहीरहनेदेज़ख़्मोंको,खींचमतचादर
बुराहालकहींचारा-गरकाहोजाए
जोबेहुनरथेतिरेशहरमें,हुएवोशाह
मैंसोचताथायहाँकुछहुनरकाहोजाए
बिछड़नेवालेबिछडजामगरयहीडरहै
बिछडकेमुझसेेतूदरदरकाहोजाए
उठाकेलाशमेरीक़ब्रमेंलिटादेदोस्त
थकाहुआयेमुसाफ़िरभीघरकाहोजाए
ख़ुदाकरेकिज़मानाबिठायेपलकोंपर
मैंचाहताहूँवोहरइकनज़रकाहोजाए
  - Daagh Aligarhi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy