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Krishnakant Kabk
shayari ka fan tum bhi seekh lo zaraa hamse
shayari ka fan tum bhi seekh lo zaraa hamse | शा'इरी का फ़न तुम भी सीख लो ज़रा हम सेे
- Krishnakant Kabk
शा'इरी
का
फ़न
तुम
भी
सीख
लो
ज़रा
हम
सेे
बस
गिटार
पर
ही
लड़की
फ़िदा
नहीं
होती
- Krishnakant Kabk
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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बिछड़
गया
हूँ
मगर
याद
करता
रहता
हूँ
किताब
छोड़
चुका
हूँ
पढ़ाई
जारी
है
Ali Zaryoun
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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हद
से
बढ़े
जो
इल्म
तो
है
जहल
दोस्तो
सब
कुछ
जो
जानते
हैं
वो
कुछ
जानते
नहीं
Khumar Barabankvi
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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मोहब्बत
कर
मोहब्बत
कर
यही
बस
कह
रहा
है
दिल
सुन
अपने
दिल
की
तू
ये
ग़ैर
की
आवाज़
थोड़ी
है
Krishnakant Kabk
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हाँ
ये
बहुत
पाबन्दियों
में
बाँध
कर
रखती
हमें
फिर
भी
ग़ज़ल
के
जितनी
अच्छी
कोई
महबूबा
नहीं
Krishnakant Kabk
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मशीनेें
दुनिया-भर
की
भी
लगा
दो
चाहे
तुम
उसके
दिल
का
रस्ता
नईं
बना
पाओगे
Krishnakant Kabk
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रोज़
ख़्वाबों
में
मुझे
दिखता
तेरा
घर
काश
नींदों
में
कभी
मैं
चल
भी
पाता
Krishnakant Kabk
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वो
रस्मन
पूछ
लेती
है
कि
मिलना
या
नहीं
मिलना
फिर
इसके
बाद
तो
मिलना
किसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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