hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Krishnakant Kabk
mausam yahii hai pyaar ka
mausam yahii hai pyaar ka | मौसम यही है प्यार का
- Krishnakant Kabk
मौसम
यही
है
प्यार
का
सावन
अभी
आया
नहीं
- Krishnakant Kabk
Download Sher Image
मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
36 Likes
हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
Read Full
Harsh saxena
Send
Download Image
4 Likes
तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
Read Full
Bashir Badr
Send
Download Image
45 Likes
इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
Send
Download Image
37 Likes
जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
Send
Download Image
39 Likes
अगर
जन्नत
मिला
करती
फ़क़त
सज्दों
के
बदले
में
तो
फिर
इबलीस
मुर्शिद
सब
सेे
पहले
जन्नती
होता
Shajar Abbas
Send
Download Image
3 Likes
शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
Send
Download Image
25 Likes
रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
Send
Download Image
48 Likes
काश
जन्नत
हमें
मिले
ऐसी
हर
तरफ़
आशिक़ाना
मौसम
हो
Amaan Pathan
Send
Download Image
3 Likes
हो
गई
है
पीर
पर्वत
सी
पिघलनी
चाहिए
इस
हिमालय
से
कोई
गंगा
निकलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
Send
Download Image
46 Likes
Read More
न
रूई
हो
तो
अपने
अश्कों
से
बाती
बनाएँगे
बुझा
दीया
हमारा
तो
हवा
से
लड़
भी
जाएँगे
बनाई
रोज़
चौदह
साल
रंगोली
बस
इस
ख़ातिर
न
जाने
रामजी
वनवास
से
कब
लौट
आएंँगे
Read Full
Krishnakant Kabk
Send
Download Image
26 Likes
उदासी
हर
तरफ़
छाने
लगी
है
मुझे
तू
याद
फिर
आने
लगी
है
अभी
तो
होश
में
आ
ही
रहा
था
हवा
फिर
मुझको
बहलाने
लगी
है
कहा
है
नासमझ
मुझको
ही
उसने
मुझे
ही
फिर
वो
समझाने
लगी
है
तरीक़ा
और
नहीं
सूझा
कोई
तो
मेरी
झूठी
क़सम
खाने
लगी
है
गई
वो
तो
लगा,
परछाई
मेरी
मुझे
ही
छोड़
कर
जाने
लगी
है
Read Full
Krishnakant Kabk
Download Image
19 Likes
हाथ
तूने
जब
लगाए
रंग
में
छा
गया
है
शह'र
तेरे
रंग
में
जाँ
लुटाते
लोग
तेरे
रंग
पर
क्या
रखा
है
इस
लुटेरे
रंग
में
और
सोने
पे
सुहागा
कुछ
नहीं
बस
तुझे
देखूँ
सुनहरे
रंग
में
तू
मुझे
जब
से
मिली
ऐसा
लगा
मिल
गया
इक
रंग
मेरे
रंग
में
ज़िंदगी
बेरंग
थी
पहले
मेरी
मैं
भी
रंगा
धीरे
धीरे
रंग
में
याद
करके
ही
तुझे
मैं
सो
गया
ख़ुद
को
पाया
फिर
सवेरे
रंग
में
Read Full
Krishnakant Kabk
Download Image
16 Likes
कैसे
हमको
अलग
करोगे
हम
इक
दूजे
के
मानी
हैं
Krishnakant Kabk
Send
Download Image
4 Likes
मशीनेें
दुनिया-भर
की
भी
लगा
दो
चाहे
तुम
उसके
दिल
का
रस्ता
नईं
बना
पाओगे
Krishnakant Kabk
Send
Download Image
4 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Self respect Shayari
Parinda Shayari
Shaheed Shayari
Dosti Shayari
Romance Shayari