baghair jiske ye dil KHafaa hai ye zindagaani sadri hui hai | बग़ैर जिसके ये दिल ख़फ़ा है ये ज़िंदगानी सड़ी हुई है

  - Krish Gour 'Jazbaat'
बग़ैरजिसकेयेदिलख़फ़ाहैयेज़िंदगानीसड़ीहुईहै
पतानहींक्यूँवोगुल-बदनहीयूँँबे-मुरव्वतलड़ीहुईहै
मेरेहीबिस्तरपेमैंनहींहूँकहाँगयावोज़हीनलड़का
येदिलउधरक्यूँधड़करहाहैयेलाशकिसकीपड़ीहुईहै
जहाँजहाँसेजलाहुआहूँवहाँवहाँसेछुआथाउसने
किसीदवाकाअसरनहींहैयेकैसीमुश्किलखड़ीहुईहै
येकैसारिश्तायेकैसीबातेंयेकैसेचक्करचलारहेहो
यूँँपासहोकरभीदूरतुमहोतुम्हेंयेकिसकीपड़ीहुईहै
सुजानगढ़थावोशहरजिससेजुड़ीहुईहैंहज़ारयादें
वहाँकीयादोंमेंसाँसलेकरयेज़िदगानीबड़ीहुईहै
  - Krish Gour 'Jazbaat'
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