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Krish Gour 'Jazbaat'
zamaane ne hamko diya bhi to kya hai
zamaane ne hamko diya bhi to kya hai | ज़माने ने हमको दिया भी तो क्या है
- Krish Gour 'Jazbaat'
ज़माने
ने
हमको
दिया
भी
तो
क्या
है
ज़रा
सी
मुहब्बत
और
इतनी
दग़ा
है
- Krish Gour 'Jazbaat'
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हमारे
बाद
तेरे
इश्क़
में
नए
लड़के
बदन
तो
चू
मेंगे
ज़ुल्फ़ें
नहीं
सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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बहुत
आसान
है
कहना,
बुरा
क्या
है
भला
क्या
है
करोगे
इश्क़
तब
मालूम
होगा,
मसअला
क्या
है
Bhaskar Shukla
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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कोई
तमग़ा
नहीं
देगा
कोई
मौक़ा
नहीं
देगा
ख़राशें
दे
रहा
है
जो
कभी
बोसा
नहीं
देगा
दु'आ
भूखा
तो
दे
भी
दे
दु'आ
अपना
नहीं
देगा
यहाँ
अब
रोने
आए
हो
कोई
काँधा
नहीं
देगा
दग़ा
इंसान
की
फ़ितरत
दग़ा
शीशा
नहीं
देगा
बराबर
हक़
की
चाहत
है
अरे
ढेला
नहीं
देगा
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Krish Gour 'Jazbaat'
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निभाई
थी
उसी
ने
इश्क़
की
रस्में
सलीक़े
से
हमीं
पागल
थे
हमको
ज़ख़्म
को
सिलना
नहीं
आया
Krish Gour 'Jazbaat'
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लगभग
इक
दो
अरसे
पहले
हम
ज़िंदा
थे
तुम
से
पहले
अब
तो
बेबस
ही
दिखते
हैं
हम
दिखते
थे
अच्छे
पहले
बात
हुई
जब
जयचंदों
की
दूर
खड़े
थे
अपने
पहले
वो
तो
दुनिया
जीतेगा
ही
जो
रक्खेगा
सपने
पहले
तुम
से
कोई
गिला
नहीं
है
तुम
से
गिले
थे
कितने
पहले
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Krish Gour 'Jazbaat'
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संदली
हुस्न
को
राएगाँ
मत
करें
मख़मली
आशिक़ी
ओढ़िए
तो
सही
Krish Gour 'Jazbaat'
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हम
कभी
ऐसा
करेंगे
ख़्वाब
में
आया
करेंगे
हाल
अपना
तुम
बताना
हम
तुम्हें
पूछा
करेंगे
हम
करेंगे
प्रेम
तुम
से
तुमको
ही
पूजा
करेंगे
इश्क़
में
मरते
हुओं
को
शे'र
से
ज़िंदा
करेंगे
गर
सही
है
बे-वफ़ाई
अबके
हम
धोखा
करेंगे
एक
दिन
'जज़्बात'
तुमको
याद
रखना
हाँ
करेंगे
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Krish Gour 'Jazbaat'
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