na zindagi ko haqeeqat na KHvaab likhna hai | न ज़िंदगी को हक़ीक़त न ख़्वाब लिखना है

  - Khalid Nadeem Budauni
ज़िंदगीकोहक़ीक़तख़्वाबलिखनाहै
वजूद-ए-ज़ीस्तकोअपनेसराबलिखनाहै
नज़रकाअपनीमुझेइंतिख़ाबलिखनाहै
तुझीकोचाँदतुझीकोगुलाबलिखनाहै
रवाँहोकारवाँचाहेज़वालकीजानिब
मुफ़क्किरोंकोमगरइंक़लाबलिखनाहै
येहुस्न-ओ-इश्क़वफ़ा-ओ-विसालकामौसम
तुम्हींबताओकिकिसकोख़राबलिखनाहै
फ़सादजुर्मअदावतग़ुरूरअय्यारी
ज़रासीउम्रमेंकितनाहिसाबलिखनाहै
वोबातलिखनाजोज़ख़्म-ए-जिगरकीमूजिबहो
अगरख़तोंकाहमारेजवाबलिखनाहै
सुख़नवरोंनेतोलिक्खाहबाबहस्तीको
हमेंहयातकोअपनीसराबलिखनाहै
  - Khalid Nadeem Budauni
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