kabhi ghazlen kabhi qisse kabhi kavita. main likhti hooñ | कभी ग़ज़लें कभी क़िस्से कभी कविता मैं लिखती हूँ

  - Priya omar
कभीग़ज़लेंकभीक़िस्सेकभीकवितामैंलिखतीहूँ
तसव्वुरमेंतुझेमिलनेकाहरज़रियामैंलिखतीहूँ
नहींहैकमवोजोइकशख़्सघरमेंसख़्तसारहता
पिताकोइसलिएसबसेेघनासायामैंलिखतीहूँ
तुझेमानासदाकृष्णातुझीसेप्रीतबाँधीहै
रहूँजोसाथतेरेख़ुदकोफिरराधामैंलिखतीहूँ
कफ़समेंजिस्मकीबसनफ़्सहरदमछटपटातीहै
लगूँगीमैंतुझेज़िंदामगरमुर्दामैंलिखतीहूँ
मिलेकोईजोजिस्मानीमुहब्बतमेंनहींउलझे
भलामुमकिनकहाँयेपलजानेक्यामैंलिखतीहूँ
जानेकैसीफ़ितरतसे'प्रिया'रबनेनवाज़ाहै
किहरठोकरसेजोपहलासबकमिलतामैंलिखतीहूँ
  - Priya omar
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