gham aur KHushi ki dosti hoti hai kya | ग़म और ख़ुशी की दोस्ती होती है क्या

  - Priya omar
ग़मऔरख़ुशीकीदोस्तीहोतीहैक्या
फिरख़ूब-सूरतज़िन्दगीहोतीहैक्या
हरदर्दपरपलकेंनमींसेभीगतीं
आँखोंमेंअश्क़ोंकीनदीहोतीहैक्या
देतेनहींतुमक्यूँसवालोंकेजवाब
इतनीज़रूरीख़ामुशीहोतीहैक्या
क्यूँदीदकरआँखेंमेरीप्यासीरहीं
उल्फ़तमेंऐसीतिश्नगीहोतीहैक्या
जोकरभलातोहोभलाकहतेसभी
यहबातअबभीकीमतीहोतीहैक्या
भागेहुएबेटेकाकरतेइंतिज़ार
परबेटीकीघरवापसीहोतीहैक्या
इसमुफ़लिसीमेंखानेमिलतीरोटियाँ
कोईख़ुशीइससेेबड़ीहोतीहैक्या
बर्बाद-ए-दिलकाफ़लसफ़ासबयाँलिखें
बिखरेबिनाभीशा'इरीहोतीहैक्या
  - Priya omar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy