येग़ज़लनज़्मयेनग़मातकिसेपेशकरूँँ
मैंमुहब्बतकेअमानातकिसेपेशकरूँँ
मैंहुआतेरीज़मींपरहीग़ज़लगोसाहिर
अपनेअशआर-ए-इबादातकिसेपेशकरूँँ
मेरेजीनेकोबहुतहैतिरेनग़्मेंसाहिर
आलम-ए-जज़्ब-ए-किफ़ायातकिसेपेशकरूँँ
बातइतनीहैकिमहबूबमिराहैसाहिर
बातइतनीभीमैंबे-बातकिसेपेशकरूँँ
इश्क़मुझकोनमजाज़ीनहक़ीक़ीमालूम
इश्क़साहिरहैयेख़ुतबातकिसेपेशकरूँँ
दादक्यादूँतिरीग़ज़लोंकीतुझेमैंसाहिर
बसकिवहशतकीयेबहुतातकिसेपेशकरूँँ
क्यूँँकहातूनेकिशाइरहैतूपलदोपलका
इंतिहाईमिरेजज़्बातकिसेपेशकरूँँ
ख़ाकसेबुतहुआफिरबुतसेहुआमैंइंसाँ
कैसेनाज़िलहुएनग़मातकिसेपेशकरूँँ