ham ko to KHair pahunchana tha jahaan tak pahunchen | हम को तो ख़ैर पहुँचना था जहाँ तक पहुँचे

  - Kaleem Aajiz
हमकोतोख़ैरपहुँचनाथाजहाँतकपहुँचे
जोहमेंरोकरहेथेवोकहाँतकपहुँचे
फ़स्ल-ए-गुलतकरहेयादौर-ए-ख़िज़ाँतकपहुँचे
बातजबनिकलीहैमुँहसेतोजहाँतकपहुँचे
मेरेअशआ'रमेंहैहुस्न-ए-मआनीकीतलाश
लोगअबतकमिरेदर्द-ए-निहाँतकपहुँचे
मुझकोरहनेदोमिरेदर्दकीलज़्ज़तमेंख़मोश
येवोअफ़्सानानहींहैजोज़बाँतकपहुँचे
तेरीज़ुल्फ़ोंकीघनीछाँवकिसेमिलतीहै
किसकीतक़दीर-ए-रसाहैकिवहाँतकपहुँचे
मंज़िल-ए-दार-ओ-रसनभीहैरुख़-ओ-ज़ुल्फ़केबा'द
देखिएशौक़हमेंलेकेकहाँतकपहुँचे
तर्जुमाँअपनाबनायाहैमुझेरिंदोंने
काशआवाज़मिरीपीर-ए-मुग़ाँतकपहुँचे
आपकेमशग़ला-ए-शेर-ओ-सुख़नसे'आजिज़'
कामतोकुछहुआनामजहाँतकपहुँचे
  - Kaleem Aajiz
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