kisi bargad ka sar-e-raah na ehsaan liya | किसी बरगद का सर-ए-राह न एहसान लिया

  - Kailash Mahir
किसीबरगदकासर-ए-राहएहसानलिया
अपनासायाथाकड़ीधूपमेंख़ुदतानलिया
भेसबदलेतोबहुतहमनेहवाकेडरसे
संग-ओ-दीवारनेहरशहरमेंपहचानलिया
लोगख़्वाबोंकेदरीचोंमेंछुपेबैठेहैं
हाकिम-ए-शहरनेहरशख़्सकाईमानलिया
नक़्द-ए-जाँकुफ़्रकीबस्तीमेंछुपायातोबहुत
संग-सारोंनेमगरदूरसेपहचानलिया
सरमेंसौदाथानिगाहोंकासफ़रलम्बाथा
हमनेइकशख़्सकोघबराकेख़ुदामानलिया
जोभीसायामिलाहमचलपड़ेपीछेपीछे
रास्ताइश्क़मेंहमनेबहुतआसानलिया
कोईचेहरेसेरक़ीबोंकेसरकाएनक़ाब
बे-वफ़ाकौनहैकितनाहैबहुतजानलिया
  - Kailash Mahir
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