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"Nadeem khan' Kaavish"
tere dil ki ik ye bastii pahle us ik raja ki thii
tere dil ki ik ye bastii pahle us ik raja ki thii | तेरे दिल की इक ये बस्ती, पहले उस इक राजा की थी
- "Nadeem khan' Kaavish"
तेरे
दिल
की
इक
ये
बस्ती,
पहले
उस
इक
राजा
की
थी
जिसने
तेरे
नाम
पर,
जंगें
भी
बे-अंदाज़ा
की
थी
- "Nadeem khan' Kaavish"
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शहर-वालों
की
मोहब्बत
का
मैं
क़ायल
हूँ
मगर
मैंने
जिस
हाथ
को
चूमा
वही
ख़ंजर
निकला
Ahmad Faraz
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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हम
घूम
चुके
बस्ती
बन
में
इक
आस
की
फाँस
लिए
मन
में
Ibn E Insha
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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बस्ती
में
अपनी
हिन्दू
मुसलमाँ
जो
बस
गए
इंसाँ
की
शक्ल
देखने
को
हम
तरस
गए
Kaifi Azmi
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हमने
पर्चे
आँसुओं
से
भर
दिए
और
तुमने
इतने
कम
नंबर
दिए
ऊंचे
नीचे
घर
थे
बस्ती
में
बहुत
जलजले
ने
सब
बराबर
कर
दिए
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Zubair Ali Tabish
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किन
नींदों
अब
तू
सोती
है
ऐ
चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ
तो
खोल
शहर
को
सैलाब
ले
गया
Meer Taqi Meer
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एक
से
एक
जुनूँ
का
मारा
इस
बस्ती
में
रहता
है
एक
हमीं
हुशियार
थे
यारो
एक
हमीं
बद-नाम
हुए
Ibn E Insha
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मैं
जब
भी
झाँकता
हूँ
ख़ुद
में
तो
एहसास
होता
है
कि
अपने
बाप
की
उम्मीद
पानी
कर
रहा
हूँ
मैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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जिसके
हाथों
में
लिखा
हूँ
मैं,
वो
मेरे
हाथों
में
नहीं
आएगा
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारा
इक
सहारा
था
उसी
से
बस
गुज़ारा
था
ये
जो
आँखें
हैं
ना
तेरी
यहाँ
इक
घर
हमारा
था
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"Nadeem khan' Kaavish"
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समझते
हैं
ये
हाल-ए-दिल
भले
ही
कम
समझते
हैं
अभी
कुछ
दोस्त
ऐसे
हैं
जो
मेरा
ग़म
समझते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरे
वतन
को
इन
सियासी
लोगों
ने
ही
खा
लिया
ख़बर
में
अब
ख़बर
कहाँ,
वही
दो-चार
रहते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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