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"Nadeem khan' Kaavish"
shaheed-e-aazam bhagatsingh
shaheed-e-aazam bhagatsingh | "शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
- "Nadeem khan' Kaavish"
"शहीद-ए-आज़म
भगतसिंह"
आँखों
में
वो
आँसू
नहीं
कुछ
ख़्वाब
सँजोया
करता
था
वतन
की
आज़ादी
के
ख़ातिर
खूनी
आँसू
रोया
करता
था
आज़ादी
का
दीवाना
था
वो
रगों
में
उबाल
खानदानी
था
जिसने
सबकुछ
लुटा
दिया
अपना
वो
वीर
भगत
बलिदानी
था
अंगारों
पर
चलकर
जिसने
एक
नई
राह
बनाई
थी
उस
मतवाले
शे'र
ने
क़सम
आज़ादी
की
खाई
थी
चाहे
उम्र
कम
रही
हो
लेकिन
वो
एक
लंबी
कहानी
था
जिसने
सबकुछ
लुटा
दिया
अपना
वो
वीर
भगत
बलिदानी
था
जिसके
दिल
में
सिर्फ़
और
सिर्फ़
इन्कलाब
की
आग
थी
आँखों
में
थी
जलती
ज्वाला
लिबास
जिसका
त्याग
थी
हर
दिल
में
निशाँ
छोड़
गया
वो
भारत
माँ
की
निशानी
था
जिसने
सबकुछ
लुटा
दिया
अपना
वो
वीर
भगत
बलिदानी
था
जब
तक
धरती-अम्बर
होंगे
मिट
न
सकेगा
नाम
तुम्हारा
भारत
का
हर
बच्चा-बच्चा
याद
रखेगा
काम
तुम्हारा
समुंदर
से
भी
गहरा
था
जो
ख़ुद
में
ही
एक
रवानी
था
जिसने
सबकुछ
लुटा
दिया
अपना
वो
वीर
भगत
बलिदानी
था
- "Nadeem khan' Kaavish"
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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इतना
तो
याद
है
इक
वा'दा
किया
था
लेकिन
हम
ने
क्या
वा'दा
किया
था
हमें
ये
याद
नहीं
Bismil Dehlavi
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तो
क्या
ऐसे
ही
रोना
आ
गया
था
नहीं
वो
याद
लहजा
आ
गया
था
Shadab Javed
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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लौट
कर
नहीं
आता
कब्र
से
कोई
लेकिन
प्यार
करने
वालों
को
इंतज़ार
रहता
है
Shabeena Adeeb
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उस
की
यादों
की
काई
पर
अब
तो
ज़िंदगी-भर
मुझे
फिसलना
है
Siraj Faisal Khan
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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मिला
ना
अब
नज़र
को,
बोल
भी
कुछ
क़सम
है
बोल
उल्फ़त
थी,
नहीं
ना
"Nadeem khan' Kaavish"
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'जौन'
को
पढ़-पढ़
के
आँखें
लाल
सी
हैं
और
अब
बदले
में
जानी
लिख
रहे
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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इबादत,
मुहब्बत,
सियासत
सभी
शरीफ़ों
को
अक्सर
सताती
ही
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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अलग
ही
नूर
था
इस
में
मिरा
चहरा
सितारा
था
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"Nadeem khan' Kaavish"
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किसी
से
पूछना
तुम
भी,
ये
आगाज़-ए-सफ़र
मेरा
मेरे
ही
साथ
में
निकला
था
रो-रो
कर
के
घर
मेरा
"Nadeem khan' Kaavish"
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