hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
"Nadeem khan' Kaavish"
alag hi noor tha is
alag hi noor tha is | अलग ही नूर था इस
- "Nadeem khan' Kaavish"
अलग
ही
नूर
था
इस
में
मिरा
चहरा
सितारा
था
- "Nadeem khan' Kaavish"
Download Sher Image
तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
Send
Download Image
50 Likes
मेहंदी
लगाए
बैठे
हैं
कुछ
इस
अदास
वो
मुट्ठी
में
उन
की
दे
दे
कोई
दिल
निकाल
के
Riyaz Khairabadi
Send
Download Image
27 Likes
वफ़ा
का
ज़ोर
अगर
बाज़ुओं
में
आ
जाए
चराग़
उड़ता
हुआ
जुगनुओं
में
आ
जाए
खिराजे
इश्क़,
कहीं
जा
के
तब
अदा
होगा
हमारा
ख़ून
अगर
आँसुओं
में
आ
जाए
Read Full
Hashim Raza Jalalpuri
Send
Download Image
23 Likes
इस
ज़माने
को
ज़माने
की
अदा
आती
है
और
इक
हम
है
हमें
सिर्फ़
वफ़ा
आती
है
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
47 Likes
हम
तो
तमाम
उम्र
तिरी
ही
अदा
रहे
ये
क्या
हुआ
कि
फिर
भी
हमीं
बे-वफ़ा
रहे
Jameel Malik
Send
Download Image
27 Likes
अब
मैं
समझा
तिरे
रुख़्सार
पे
तिल
का
मतलब
दौलत-ए-हुस्न
पे
दरबान
बिठा
रक्खा
है
Qamar Moradabadi
Send
Download Image
64 Likes
उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
Send
Download Image
26 Likes
तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
Read Full
Subhan Asad
Send
Download Image
33 Likes
तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
Send
Download Image
117 Likes
क्यूँँ
पशेमाँ
हो
अगर
वअ'दा
वफ़ा
हो
न
सका
कहीं
वादे
भी
निभाने
के
लिए
होते
हैं
Ibrat Machlishahri
Send
Download Image
19 Likes
Read More
नदीम'
पहले
इश्क़
ने,
हाँ
यूँँ
सबक
दिया
कि
हम
हमारे
दिल
की
हरकतों
से
होशियार
रहते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
Send
Download Image
2 Likes
कोरे
काग़ज़
पर
बच्चों
की
शक्ल
बनाई
होती
थी
जब
भी
उसके
दरवाज़े
पर
आवाजाही
होती
थी
यूँँॅं
तो
सारी
महफ़िल
में
हम
ख़ुद
भी
जुदास
रहते
थे
वस्ल
की
रात
तो
हम
दोनों
की
ख़ूब
पढ़ाई
होती
थी
Read Full
"Nadeem khan' Kaavish"
Send
Download Image
6 Likes
वज़ू
करके
छुआ
तुझको,
यूँंँ
पाकीज़ा
मुहब्बत
थी
तुम्हारे
बाद
तो
मैंने
हवस
को
ही
मिटाया
था
"Nadeem khan' Kaavish"
Send
Download Image
6 Likes
अजब
से
झूठ
कहता
हूँ
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
किसी
ने
सच
नहीं
माना
तो
जब
से
झूठ
कहता
हूँ
वकीलों
से
भी
यारी
हैं
अदब
से
झूठ
कहता
हूँ
किया
था
इश्क़
मैंने
भी
सो
तब
से
झूठ
कहता
हूँ
यक़ीं
मत
कर
तू
ऐ
दुनिया
मैं
रब
से
झूठ
कहता
हूँ
मेरी
ये
बात
सच
है
बस
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
तुझे
सबकुछ
बता
दूँ
क्या
कि
कब
से
झूठ
कहता
हूँ
Read Full
"Nadeem khan' Kaavish"
Download Image
4 Likes
ज़रा
सोचो
कि
मेरा
दिल
सभी
का
है,
सियासत
है
"Nadeem khan' Kaavish"
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Nazara Shayari
Sazaa Shayari
Chehra Shayari
Political Shayari
Lab Shayari