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"Nadeem khan' Kaavish"
kisi se poochna tum bhi ye aagaaz-e-safar meraa
kisi se poochna tum bhi ye aagaaz-e-safar meraa | किसी से पूछना तुम भी, ये आगाज़-ए-सफ़र मेरा
- "Nadeem khan' Kaavish"
किसी
से
पूछना
तुम
भी,
ये
आगाज़-ए-सफ़र
मेरा
मेरे
ही
साथ
में
निकला
था
रो-रो
कर
के
घर
मेरा
- "Nadeem khan' Kaavish"
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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सब
क़स
में
खाकर
देखी
हैं
सब
क़स
में
सच्ची
होती
हैं
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"Nadeem khan' Kaavish"
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कहो
तो
कभी
तुम
कोई
बात
हम
सेे
छिपाते
ही
रहते
हो
जज़्बात
हम
सेे
न
आँखें
न
बातें
न
साँसें
न
ही
दिल
हाँ
लेकिन
मिलाओ
कभी
हाथ
हम
सेे
किसी
और
का
कोई
हक़
भी
नहीं
है
कहानी
की
तेरी
शुरूआत
हम
से
हमारे
अलावा
न
हो
कोई
हम
सेा
तेरी
जीत
हम
सेे
तेरी
मात
हम
सेे
जिधर
भी
नज़र
हैं
है
चर्चे
तेरे
ही
बहुत
अच्छे
हैं
तेरे
हालात
हम
सेे
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"Nadeem khan' Kaavish"
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ज़मीं
को
तर-ब-तर
करने
किसी
दिन
आएगा
बादल
न
जाने
किन
ग़रीबों
के
घरों
को
खाएगा
बादल
सितारे
नोच
लाऊॅंगा
किसी
दिन
ज़िद
पे
आया
तो
अभी
ग़र्दिश
में
हूॅं
यारों
बहुत
इतराएगा
बादल
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"Nadeem khan' Kaavish"
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कभी
तकलीफ़
होती
थी
तो
तुमको
याद
करते
थे
अभी
जब
याद
करते
हैं,
बहुत
तकलीफ़
होती
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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यार
तेरी
चीज़
सब
हम
ने
हटा
दी
इस
नज़र
से
फेंक
आया
वो
घड़ी
भी
जो
कि
लाई
थी
शहरस
"Nadeem khan' Kaavish"
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